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तेरी खुशबू बनकर

                
                                                         
                            मै खुशबू बन साथ में तेरे, हर पल रहना चाहता हूँ,
                                                                 
                            
तू थोड़ा-सा साथ दे मेरा, मैं भी जीना चाहता हूँ।

तेरे जीवन के हर पहलू में, अपनी जगह बनाना है,
तेरी हँसी में हँसना मुझको, तेरे ग़म में आँसू बहाना है।

मैं पुष्प हूँ, तुझसे मोहब्बत ही, मेरा जीवन-गहना है,
तेरी साँसों की लय में मुझको, हर पल बहते रहना है।

तेरे आँगन की मिट्टी में, अपनी महक बिखेरूँगा,
तेरी राहों के काँटों पर भी, बनकर खुशबू ठहरूँगा।

तेरी खुशियों में रंग भरूँगा, तेरे दुःख महसूस करूंगा,
तू चाहे जिस ओर भी जाए, तेरे संग-संग चलूँगा।

तू देखे या न देखे मुझको, एहसास मेरा पाना,
तेरे हर पल, हर धड़कन में, मेरा होगा आना जाना।

मुरझाकर भी चाह यही है, तुझसे दूर न हो पाऊँ,
'अंजाना ' यादों के उपवन में, बनकर खुशबू रह जाऊँ।
-सूबा लाल 'अंजाना '
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
59 मिनट पहले

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