ये अमूल्य हीरे से कीमती,
नहीं खरीदी जा सकती,
न ही उगाई जाती है,
न ही बेची जा सकती।
दिल के तारों से जुड़ती है,
प्रबल अटूट ये होती,
सच्ची, पावन, शक्तिशाली,
बेमिसाल भी ये होती।
कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता,
आज भी निभाई जाती है,
पर स्वार्थ भरी इस दुनिया में,
कहानी ही सुनाई जाती है।
आज हर गली, हर कोने में,
ईर्ष्या की खेती होती है,
राजनीति की विषधर नागिन,
हर पल ज़हर उगलती है।
टाँग खींचती दुनिया देखी,
खुद को गड्ढे गिरते देखा,
खुद आगे बढ़ न पाए कोई,
ऐसा भी हमने देखा।
कोई बढ़ जाए हमसे आगे,
मन को ये मंजूर नहीं,
दूसरे की खुशियों में खुश हों,
ऐसा अब दस्तूर नहीं।
सुख में तो संसार खड़ा है,
दुःख में कौन सहारा है?
जो आँसू को अपना समझे,
वही मित्र हमारा है।
धन-दौलत सब छूट जाएगी,
साथ न कोई जाएगा,
मगर सच्ची मित्रता का रिश्ता,
जीवन भर याद आएगा।
न जाति देखे, न धर्म देखे,
न ऊँच-नीच का भेद करे,
जिसके मन में प्रेम बचा हो,
वही दोस्ती का मान करे।
मित्रता कोई शब्द नहीं है,
ये जीवन का विश्वास है,
सच्चा मित्र मिले यदि जग में,
तो समझो ईश्वर पास है।
-सूबा लाल "अंजाना"
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