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रक्षाबंधन — विश्वास का धागा

                
                                                         
                            दिलों को जोड़ने वाला वह कच्चा धागा नहीं होता है,
                                                                 
                            
वह बड़े विश्वास और रक्षाबंधन का धागा होता है।
प्यार के रिश्ते का बंधन बहुत अनोखा होता है,
मन का हर एक शिकवा पल में दूर कर देता है।

प्यार का कौन-सा रिश्ता नहीं जुड़ना चाहता है,
वर्ष में यह पावन दिन बस एक बार आता है।
संजोकर प्यार की गठरी, बहन भाई के हित की,
मधुर मुस्कान के संग राखी का पर्व आता है।

बहन की आँखों में भाई के सुख के सपने होते हैं,
भाई के मन में बहन के लिए दुआएँ होती हैं।
एक धागे में बंध जाते हैं प्रेम और विश्वास,
राखी के इस बंधन में बसता है मधुर एहसास।

कैसे आए यह दिन, रक्षा का आशीष दे पाए,
बहन-भाई के मन में प्रेम की गंगा बहाए।
राखी के बंधन को संभालें दिल से अपने,
हर वर्ष राखी आए, साकार करे सब सपने।

न हो मन में कोई शिकवा, न कोई रूठापन हो,
बहन के माथे पर भाई के प्यार का चंदन हो।
जन्म-जन्म तक यूँ ही यह रिश्ता कायम रहे,
रक्षाबंधन का पावन पर्व सदा मंगलमय रहे।

बहन की राखी में प्रेम, भाई की कलाई में विश्वास,
यही तो है रक्षाबंधन—रिश्तों का सबसे सुंदर एहसास।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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