आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कैमरे का सहारा

                
                                                         
                            अब तो डर को लेकर भी,
                                                                 
                            
जगह-जगह चर्चा हो रही है,
सी.सी.टी.वी. कैमरों के संग,
बड़ी खुराफात हो रही है।

देखते ही सबसे पहले,
इन्हीं पर आघात हो रही है,
डरावनी आशंकाओं से बचने को,
इनकी ही बात हो रही है।

कैमरे का सहारा लेकर,
लोग निश्चिंत हो जाते हैं,
घर से दूर कहीं जाने पर,
इसको पहरेदार बनाते हैं।

लेकिन कैमरे के रहते भी,
कब किसका सपना टूटेगा,
सिर्फ निगरानी के भरोसे से,
क्या हर खतरा छूटेगा?

डर से बचने का उपाय यही है,
सजग रहें, सावधान रहें,
कैमरा केवल आँख है अपनी,
खुद भी जागरूक इंसान रहें।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 सप्ताह पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर