किस अपराध की ऐसी सज़ा थी, शिक्षा जिनसे छीन ली गई?
ज्ञान-दीप के पावन मंदिर की, राह उन्हीं से छीन ली गई।
उपनयन का अधिकार गया तो, सम्मान भी खोता गया,
एक समुदाय समय के हाथों, धीरे-धीरे रोता गया।
फिर इतिहास के पन्नों पर भी, शब्द बदलते जाते थे,
सत्ता जिसके हाथ रही बस, अर्थ वही लिखवाते थे।
मानव को मत जन्म से तौलो, कर्मों से पहचान करो।
जिसने श्रम से जग को सँवारा, उसका भी सम्मान करो।
जिसके श्रम से अन्न उगे हैं, जिससे चलता सारा जहान,
उसके माथे अपमान लिखना, कैसा है यह धर्म-विधान?
अब न कोई ऊँचा होगा, अब न कोई नीचा होगा।
संविधान की शपथ यही है, हर मानव बस मानव होगा।
समता होगी, न्याय रहेगा, बंधुत्व का विस्तार रहेगा।
भारत तभी महान बनेगा, जब सबका सत्कार रहेगा।
ऐसा मिलकर सब दीप जलाएँ, कि सारा अँधियारा हारे।
जाति नहीं, इंसान बड़ा है, यही संदेश जगत में सारे।
जिस दिन श्रम का मान बढ़ेगा, भारत का सम्मान बढ़ेगा।
जिस दिन मानव मानव होगा, उस दिन सच्चा कल्यान होगा।
-सूबा लाल "अंजाना"
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