ज़िंदगी जो हमको मिली है, ईश्वर का वरदान है,
इससे बढ़कर जग में कोई, और नहीं सम्मान है।
जो भी पाया, प्रेम से पाया, हर पल उसका मान करो,
शुक्र मनाओ उस सृष्टा का, उसका नित गुणगान करो।
राह कभी आसान न होती, ऊँची-नीची डगर मिले,
धूप कहीं तो छाँव कहीं है, काँटे भी हैं, सुमन खिले।
सुख की बेला क्षणिक ठहरती, दुःख भी कब स्थायी है,
दिन के पीछे रात चली है, नई प्रभात फिर आई है।
जो भी साथी मिले राह में, ईश्वर का उपहार समझो,
हर संबंध अनमोल रत्न है, उसको सच्चा प्यार समझो।
संघर्षों की अग्नि में तपकर, कुंदन सा इंसान बने,
ठोकर-खाकर चलने वाला, मंज़िल का वरदान बने।
जिसने जीवन को पढ़ डाला, सुख-दुःख दोनों एक समान,
वही जान पाया है जग में, जीवन का सच्चा सम्मान।
शिकवा और गिला न कोई, जीवन अनुपम है सौगात ,
हँसकर जीना, प्रेम लुटाना—यही मनुज की है औकात ।
चलो कृतज्ञ हृदय लेकर हम, हर पल का करें अभिनंदन,
जीवन के इस दिव्य प्रसाद का, मिलकर नित्य करें वंदन ।
-सूबा लाल "अंजाना"
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