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ईश्वर की इनायत

                
                                                         
                            ईश्वर की इनायत जिस पर भी कभी हो जाए।
                                                                 
                            
बुझती हुई उम्मीद भी एक बार फिर से जग जाए।

न धन की चाहत और न जग के सम्मान की जरूरत है
बस ईश्वर की इनायत ही वरदान खूबसूरत है।

एक बार जिस पर ईश्वर की इनायत हो जाए,
काँटों भरी राहों में सदा सदा के लिए फूल खिल जाए।

मान और सम्मान सिर्फ ईश्वर की इनायत है,
उसकी कृपा बिना तो सब कुछ वीरान है।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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