ईमानदारी, सत्य की राहें,इतनी भी सरल नहीं होती है,
काँटों से भी भरी डगर है, फूलों सी नरम नहीं होती हैं।
लक्ष्य से पूर्व ये कठिन सफर है, हर पल परखा जाता है,
सच्चाई पर चलने वाला, धैर्य से चलता जाता है।
कभी अवरोध, कभी अपमान, कभी मिलते हैं ताने,
कभी छलावे राह रोकते, कभी बदलते ज़माने।
डरकर राहें छोड़ जो देता, मंज़िल ना वह पाता है।
जो डटकर सामना है करता,भाग्य भी साथ निभाता है
अग्नि में तपकर के ही सोना, सुंदर रूप को पाता है,
संघर्षों की तपती भट्ठी में, जीवन बन पाता है।
सत्य पराजित भी होता हो , ऐसा कोई इतिहास नहीं,
देर भले हो न्याय में लेकिन, सत्य ही रहता सदा सही।
इसलिए हे पथ के राही! मत साहस को खोने देना,
ईमानदारी और सच्चाई का दीपक हरदम जलने देना।
कठिन परीक्षा हँसकर झेला जो, वही सफलता पाता है,
ईमानदारी का सच्चा राही, नया इतिहास बनाता है।
-सूबा लाल "अंजाना"
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