चाहे कमजोर भुजाएँ हों,
पर जोश अभी भी जीवित है।
तन पर चाहे घाव हजारों हों,
मन का साहस फिर भी अविजित है।
पाँवों में जूते फटे हुए हैं,
तो इससे क्या होता है?
हिम्मत के जोशीले जूतों से,
हर काँटा भी रोता है।
धन की धारा पतली ही सही,
हौसलों का सागर गहरा है।
जिसके मन में संकल्प हो दृढ़,
उसका हर संघर्ष सुनहरा है।
मैं निर्भय होकर बढ़ता जाऊँ,
रुकना मेरी है रीत नहीं।
लक्ष्य भले आकाश में हो,
उससे मेरी है प्रीत सही।
हम थकेंगे नहीं,
हम रुकेंगे नहीं।
जब तक लक्ष्य न पा लेंगे,
तब तक हम झुकेंगे नहीं।
रग-रग में उष्ण लहू बहता,
साहस जिसकी पहचान है।
पीछे मुड़कर देखे जो,
वह वीर नहीं, अंजान है।
संघर्ष ही जीवन का सत्य है,
सुख का ना कोई शॉर्टकट है।
पग-पग काँटे बिछे मिलेंगे,
पर उनसे कोई भय ही नहीं।
एक बार हृदय जो ठान लिया,
पीछे हटने का नाम न लूं।
आँधी, वर्षा, हो या धूप घनी
इनसे पथ तजने का नाम न लूं।
यदि राहों में गरीबी आ आए,
जल पीकर भी हम चल देंगे।
सूखी रोटी गर मिले हमें तो,
हँसकर उसे निगल लेंगे।
भाग्य नहीं, पुरुषार्थ लिखेगा,
जीवन का हर एक एक पल।
मेहनत की मशाल जलाकर,
अँधियारे को कर देंगे असफल।
हम थकेंगे नहीं,
हम झुकेंगे नहीं।
जीत हमारी निश्चित है,
हम रुकेंगे नहीं।
जब तलक लक्ष्य न हाथ आए,
कदम हमारे रुकेंगे नहीं।
जीवन के अंतिम क्षण तक,
हम थकेंगे नहीं...
हम रुकेंगे नहीं...!
-सूबा लाल "अंजाना"
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