दिल हर मानव में होता तो,
लोग कभी न दुखी होते।
अपने जैसे ही सबको समझते,
सोच-समझकर ही जीते।
कभी-कभी अनकहे ही आँसू,
सब कुछ कह जाते हैं,
जिनके भीतर दिल ज़िंदा हो,
वे ही दर्द समझ पाते हैं।
-सूबा लाल "अंजाना"
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