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मै तुम्हे सुनना चाहती हूं

                
                                                         
                            मैं तुम्हें ,सुनना चाहती हूं,
                                                                 
                            
तुम्हारे अल्फाजो को
दिल में सजोना चाहती हूं,
मुझे शायद पता है
तुम्हे ,सिर्फ बाहरी
लिबास से कठोरता
की पदवी मिली है,
मैं तुम्हारे भीतर
की कोमलता को,
महसूस करना चाहती हूं
मैं तुम्हें सुनना चाहती हूं।
तुम्हारे लब जो कहा ना सके
तुम्हारी आंखें जो बयां
करती रही ,ऐसी
दास्तान सुनना चाहती हूं,
मैं तुम्हें सुनना चाहती हूं ।
क्यों ओढतें हो लिबास
खुलकर व्यक्त करो,
अपनी भावनाओं को
भीतर की संवेदना को,
क्यो अधूरी रह जाती है
हर बात तुम्हारी, वह सब
मैं सुनना चाहती हूं ।
बाहर से नहीं, भीतरी आवरण
उतरना चाहती हूं,
मैं तुम्हें सुनना चाहती हूं।
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2 महीने पहले

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