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एक वक्त की रोटी से परे

                
                                                         
                            मेले में खिलौने बेचते बच्चे,
                                                                 
                            
उम्र से कच्चे, मगर दर्द से पक्के,
हाथों में खिलौने हैं, पर किस्मत में नहीं,
मोल-भाव करती भीड़, पर समझती नहीं,
उनके सपने मेले से बड़े नहीं होते,
एक वक्त की रोटी से परे नहीं होते।
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2 घंटे पहले

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