कुछ लोग दूर मंदिर जाते हैं
घर का मंदिर भूल जाते है
वहाँ भीड़ में घण्टो खड़े रहकर
व्यवस्था का दोष बताते हैं।
कुछ तो इनको व्यापार
का केंद्र खुद बनाते है
उनसे कहना चाहता हूं
जो पूजा को बाहर जाते हैं।
क्यो जाते हो वहाँ
भीड़ लाइन हो जहाँ
किस ग्रन्थ में कहा है
कि दर्शन को यहाँ वहाँ जाओ
घर पर ही पूजा में मन लगाओ
ईश्वर को कण कण में व्याप्त है
पास के मंदिर में जाना ही पर्याप्त है
गणेश ने गौरी शंकर का चक्कर लगाया
मात पिता की पूजा को श्रेष्ठ बताया।
दर्शन की मोबाइल में एलबम न तैयार करो
घर पर मदद कर भंडारे, पूजा पाठ करो।
मन को उससे संतुष्टि भी मिल जाएगी
गरीब की दुआ भी भाग्य आपका बदल जाएगी।
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