शाखों से गिरते ये पत्ते
मौसम का हाल बताते हैं
बस रुको एक और पखवाड़ा
हम भीषण गर्मी लेके आते हैं
सूर्योदय के होते ही
जब किरणे धरती को चूमती है
जलने लगती है ये धरा
और सारी मनस्थिति घूमती है
मिलती नही कहीं छांव ओट
जिसके नीचे सब रुक जाएं
थोड़ा खालें पानी पी लें
थोड़ा तो काम से सुस्ताए
गर्मी की तपन से जब
जानवर और पंछी झुलसते हैं
तब याद आती है कि हम
प्रकृति के साथ गलत करते हैं
अगर सब मिलजुल कर
कम से कम एक वृक्ष लगा जाएं
तो शायद इस धरती का
थोड़ा सा तापमान कम कर पाएं।
-स्नेहा सिंह
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