कुछ खोने का एहसास है मुझे
कुछ पाने का आस है मुझे
जो हो न ये एहसास
तो जीवन में न रहती कोई साज़
एहसास है खुद के मिटने पर
हर समय गिरकर उठने पर
किस सुकून की तलाश में आज
खो गई हु मै
हर राह पर पत्थरों से
जूझ रही हु मै
बिन लगाम के घोड़े पर
सवार है मन
चल पड़ी है दिशाहीन
थक गया है मन
फिर भी सुकून की तलाश में
भटक रही हु आज भी मैं
हजारों मुखौटों में खोज रही हु
एक चेहरा अपने पन का
बस एक चेहरा अपने पन का।
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