सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ,
सम्पूर्ण धरा में हरितमा छाई, तुम चले आओ।
बादलों की गर्जना धड़काये, धड़कन मिटाने चले आओ,
बारिश की फुहारें पुकारें, साथ भींगने चले आओ।
मेहंदी की सौंधी महक हाथों में ,तुमको पुकारे,
खूबसूरत मेहंदी को निहारने तुम चले आओ।
हरे,पीले गोटेदार लहंगे पहनने मेरा मन ललचाये,
साथ मिलकर घूमर घालेंगें,जल्दी से लौट आओ।
भोलेनाथ का करेंगें अभिषेक, कांवड चढ़ायेंगे,
फिर एक साथ झूले पर बैठ जोर से पींगे मारेंगें।
झूले कर रहें इंतजार विरहिणी तुम्हें पुकारे,
अब और नहीं देर करो साजन,रह रहकर तेरी याद सताये, तुम चले आओ।
-सीमा केडिया
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