करी प्रतीक्षा वर्षों तक माता शबरी ने,
प्रभु के लिए रास्ता बुहारती जंगल में,
रोज तोड़कर लाती थी बेर खिलाने,
पुरषोत्तम राम स्वयं आये दर्शन देने।
प्रतीक्षा करती रही करमा बाई प्रभु का,
कब आयेंगे खिचड़ी का भोग लगाने।
फिर तो प्रभु को भी इंतजार रहता,
करमा बाई की खिचड़ी खाने का।
चौदह वर्ष प्रतीक्षा की भाई भरत ने,
राम का वनवास से लौट आने का।
प्रतीक्षा की सुमित्रा और उर्मिला ने,
लक्ष्मण का राम संग वापिस आने का।
हर अच्छा काम होता तभी सफल,
जब इंतजार धैर्य और शांति से रखें।
इंतजार का होता मीठा फल,
अपनी सोच और नीयत सकरात्मक रखें।
-सीमा केडिया
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