बड़ा अचम्भा होत है यह देख
लोगो के नजरिया का तेज,
मुखौटा बड़ी सुंदर है इनके
सुकर्म से इन्हें बिल्कुल परहेज।
अपना बाहुबल दिखाते फिरते है ये
जो चाहे करते है दुराचारी,
कमेटी है खेटकियों का
बने फिरते है शीर्ष्टाचारी।
रुलाए है हर जन को
फिर भी लोग कुछ न बोले,
सब जाने इनके कर्म काण्ड
फिर भी राज न खोले।
-श्याम सुंदर सिंह
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