चाले चल इतराते हो
वजह बताना तो पड़ेगा,
हर सच को झूठ बनाया है
एक दिन तो मानना पड़ेगा।
गुनाह किया है तुम सबने
एक दिन कबूलना ही पड़ेगा,
जिस आग में झोंका है सबको
उस आँच को सहना तो पड़ेगा।
-श्याम सुंदर सिंह
सिंहपुर-फेफना-बलिया
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