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सुधर के दिखाओ

                
                                                         
                            हिन्दी कविता- सुधर के दिखाओ 
                                                                 
                            
घर मेरा जलाने चले, घर अपना बचा के दिखाओ 
खा के मार ना भूले सीर अपना बचाके दिखाओ 
बेकसूर मासूमो खून बहाने से क्या फायदा 
मर्द बनके सामने आओ बच के दिखाओ 
छुप छुप करते वार क्यो कायरो कि तरह 
एक बार वार मेरा सह के गर तुम दिखाओ
ड्राइवर मजदूरो ब्यापरियो ज़ोर ना आजमाना 
जरा इस्लामाबाद बुलचिस्तान बचा के दिखाओ 
आ रहा अमनो चैन अब हमारे भारत देश मे 
दिल ना जला आवाम आपनी पाल के दिखाओ 
हमसे जो छिना छल से अब बचा ना पाएगा 
लेके रहेंगे पीओके हिम्मत है बचा के दिखाओ 
हम क्या मारेंगे तुझे तेरे ही मार डालेंगे 
खिलाफत शैलाब तू रोक के दिखाओ 
हुआ जो हाल ओसामा बगदादी याद रखना 
होगा बुरा हाल तेरे आकाओ बचाके दिखाओ 
प्रेम शांति मन चैन के दूत हम तुम्हें आता नहीं 
सलाह भारती गर हो सको सुधर के दिखाओ 
श्याम कुँवर भारती [राजभर]
कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,
मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286


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6 वर्ष पहले

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