खुदा का नूर हो तुम,चांद की रात हो!
तराशा गया है फर्श पर,या अर्श की करामात हो!!
निगाहें हैं झीलों का आईना तुम्हारी,
होंठ जैसे महकता गुलाब हो!!
और चेहरा है चमकते महताब जैसा,
जुल्फों में जैसे बसती हिजाब हो!!
पाकर तुम्हें लगता है ऐसा,
शिद्दत को मेरी मिल गया खिताब हो!!
लफ्ज़ कम हैंं तारीफ में तुम्हारी!
जो भी हो तुम चीज लाजवाब हो!!
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