दर्द जब हद से बढ़ता है तब आँसू कोई पी नहीं पाता है
फिर हाल-ए- दिल बगैर बताए रह नहीं पाता है
जबकि टूटा हो दिल अपनों से तो ख़ामोशी बेहतर है
ये अलग बात कि ज़ख्म नासूर बन जाता है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X