जब्त किए जज़्बात, मम्मी,जब से छूटा दामन तुम्हारा,
अब होती नहीं दिल की बात जब से छूटा दामन तुम्हारा।
तस्वीर पर तुम्हारी गिरते हैं मेरे आँसू बार-बार,
मिलता नहीं सुकून कहीं, जब से छूटा दामन तुम्हारा।
राहत तो मिलती है बहुत तुम्हारे सामान को छूकर,
फिर भी रहती है ख़लिश, जब से छूटा दामन तुम्हारा।
तुम सा कोई मिला नहीं, देख ली दुनिया सारी,
जैसे-तैसे बसर करते हैं, जब से छूटा दामन तुम्हारा।
जैसे देखा है हमने तुमको हर एक कर्ब से निकलते,
वैसे ही जी रहे हैं हम भी, जब से छूटा दामन तुम्हारा।
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