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वीणा की स्वर-वंदना

                
                                                         
                            श्वेत कमल पर विराजी माता, ज्ञान सुधा बरसाओ,
                                                                 
                            
वीणा के मधुरिम सुर से, जीवन-राग सुनाओ।
तम के गहरे बादल हर लो, भर दो नव पहचान,
जय-जय माँ शारदे भवानी, दो मुझको वरदान l

हंस-विहंग संग शोभित माता, निर्मल पावन रूप,
तेरी कृपा से जगमग करता, जीवन का हर धूप।
अक्षर-अक्षर दीप बने जब, मिटे अज्ञान निशान,
तेरी वाणी अमृत बरसाए, जग पाए सम्मान l

कलम हमारी सत्य लिखे बस, मन में हो विश्वास,
शब्द-शब्द में प्रेम महके, जग में फैले प्रकाश।
विद्या, विनय, विवेक की गंगा, बहे सदा अविराम,
तेरी कृपा से ऊँचा हो माँ, भारत देश का नाम l

जब भी मन भ्रम-पथ पर भटके, देना सही दिशा,
तेरे चरणों की धूल बने माँ, जीवन की अभिलाषा।
सुर, संगीत, साहित्य, साधना-सब तुझसे पहचान,
तेरी महिमा गाए जग सारा, जय माँ भगवती महान l

वीणा की हर तान में माता, बसता तेरा प्यार,
तेरी कृपा से खिल उठता है, जीवन का संसार।
ज्ञान-ज्योति से जग आलोकित, मिटे सभी अज्ञान, जय-जय माँ सरस्वती अंबे, रखना सदा सम्मान l
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2 महीने पहले

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