स्वर्ण किरण का रथ सजाकर, नभ में रोज़ पधारें,
अंधकार के हर कोने में, आशा दीपक धारें।
सात अश्व की तेज़ सवारी, जग का पथ उजियारा,
जय-जय सूर्य नारायण, तुमसे जग है सारा।
तेरी पहली लालिमा से, कलियाँ हँसना सीखें,
तेरे स्पर्श से पर्वत, नदियाँ जीवन-गीत लिखें।
धरती का हर तिनका बोले, तेरा ही उपकार, तुमसे ही हर प्राण में बहता, जीवन का विस्तार।
किसान तुम्हें नमन करे, तुम अन्नदाता बनते,
तेरी गर्मी से खेतों में, स्वर्णिम सपने सजते।
मेहनत करने वालों का तुम, बनते हो सम्मान, तेरे दम पर खिल उठता है, भारत का अभियान।
रोग-शोक सब दूर भगाओ, तन-मन में बल भर दो,
ज्ञान, विवेक और सत्य की, ज्योति हृदय में कर दो।
अहंकार की छाया हर लो, सेवा का वरदान,
भक्ति से हम शीश झुकाएँ, हे दिव्य भगवान।
जब भी जीवन राह कठिन हो, तुम साहस बन जाना,
टूटे मन की हर धड़कन में, नव विश्वास जगाना।
तेज, तपस्या, धर्म, करुणा-सबका तुम आधार, जय-जय सूर्य नारायण, करो जगत उद्धार।
जय आदित्य! जय भास्कर! जय दिवाकर भगवान!
सदा रहे हम सब पर, सूर्य नारायण का वरदान।
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