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शिव स्तुति - हर हर महादेव

                
                                                         
                            जय त्रिलोचन, नीलकंठ प्रभु,
                                                                 
                            
जय-जय भोलेनाथ।
डमरू की हर पावन धुन में,
गूँजे जग की बात l

जटाओं से गंगा झर-झर बहे,
चंद्र करे श्रृंगार।
कंठ विराजे हलाहल विष भी, मुख पर मधुर विहार l

नाग बने हैं हार तुम्हारा,
बाघाम्बर अभिराम।
भस्म-विभूषित दिव्य स्वरूप हो, शिव अनंत तुम्हारा नाम l

ॐ नमः शिवाय की ध्वनि से,
मन का तम मिट जाए।
एक तुम्हारा स्मरण मात्र ही,
जीवन सफल बनाए l

कैलाशाधिपति, दीनदयाला,
करुणा के भंडार।
भक्त पुकारे प्रेम से तुमको,
दौड़े आते हर बार l

नटराज जब तांडव करते,
काँपे नभ और धाम।
सृष्टि, स्थिति, संहार समाए,
तेरे पावन नाम l

अर्धनारीश्वर रूप निराला,
शक्ति-शिव का मेल।
तुझसे ही संसार सुशोभित,
तुझसे जीवन खेल l

मन में श्रद्धा, तन में सेवा,
अधरों पर हो नाम।
हर श्वासों में बसो सदाशिव,
हर धड़कन शिव-शिव गान l

हे भोले ऐसी कृपा करना,
अहंकार सब हर लो।
सत्य, प्रेम, सेवा के पथ पर,
जीवन मेरा धर दो l

हर हर महादेव जय शिव शंकर कर दो भव से पार।
तेरी शरण जो एक बार आया, उसका हुआ उद्धार l
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3 महीने पहले

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