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माँ कालरात्रि की महिमा

                
                                                         
                            काली घटा-सी रूप तुम्हारा, जग में गूँजे नाम तुम्हारा, दुष्टों का संहार करो माँ, भक्तों का उद्धार करो माँ।
                                                                 
                            
जय-जय माँ कालरात्रि भवानी, तुमसे जग की अमर कहानी।
रूप भले विकराल तुम्हारा, है ममता का भाव निराला, तेरी ज्योति जहाँ पर जागे, दुख का बादल दूर ही भागे।
अंधकार से जो घबराए, तेरा नाम उसे राह दिखाए, मन में साहस, हृदय में शक्ति, तेरी कृपा से मिलती भक्ति।
जय-जय माँ कालरात्रि भवानी, तुमसे जग की अमर कहानी।
गर्दभ पर सवार हो माता, भक्तों के संकट हर जाती, खड्ग उठाकर दुष्ट मिटाती, अभय हस्त से आस बँधाती।
तेरी महिमा अपरंपारा, तू ही जग का एक सहारा, तेरे दर से कोई न हारे, तू ही बिगड़े भाग सँवारे।
राह कठिन हो, रात अँधेरी, तेरी कृपा बने प्रभात सुनहरी, जब-जब मन में भय छा जाए, तेरा नाम हिम्मत बन जाए।
जय-जय माँ कालरात्रि भवानी, सुन ले मैया विनती हमारी।
न धन माँगूँ, न माँगूँ माया, बस रखना सिर पर अपनी छाया, मन में सच्चाई भर देना, सही राह पर चलना सिखाना।
द्वेष मिटे और प्रेम बढ़े माँ, हर आँगन में दीप जले माँ, तेरी कृपा से जग मुस्काए, हर मुख पर मुस्कान सजाए।
हे माँ कालरात्रि, महाकल्याणी, रखना लाज, जगत की रानी। तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, जय माता दी सदा मैं गाऊँ।
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52 मिनट पहले

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