साँझ ढले जब दीप जले,
मन में तेरी ज्योति जले,
माँ गौरी, तेरे नाम से ही
सूने आँगन फूल खिले।
माथे पर सिंदूर सजे,
नयनों में विश्वास रहे,
तेरी कृपा की छाँव मिले तो
हर मौसम मधुमास रहे।
तू बेटी में ममता बनकर,
तू बहना बनकर प्यार,
तू पत्नी के धैर्य में बसती,
तू माँ का सच्चा आधार।
जहाँ नारी चुप रह जाती,
तू उसकी आवाज़ बने,
टूटे मन के कोने-कोने में
फिर जीने का राज़ बने।
जिस घर में तेरा नाम गूँजे,
वहाँ न दुःख ठहर पाए,
तेरी कृपा की एक किरण भी
अँधियारा हर ले जाए।
माँ, इतना सा वरदान रहे-
मन में श्रद्धा, नयन में नीर,
तेरे चरणों में मिलती रहे
हर जन्म की सच्ची तक़दीर।
हे माँ गौरी, हाथ रहे तेरा,
जीवन चाहे जैसा हो-
तेरी छाया बनी रहे बस,
हर पल मन के पास रहे।
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