माथे चंद्र सुशोभित प्यारा,
रूप लगे जग से न्यारा,
सिंह सवारी, तेज निराला,
तूने भक्तों को सँभाला।
घंटनाद से गूँजे धरा,
तेरे नाम से मिटे व्यथा,
तेरी शक्ति, तेरा उजियारा,
माँ, तू ही जग का सहारा।
लाल चुनरिया, स्वर्णिम आभा,तेरे दर्शन परम प्रभा,
हाथों में अस्त्रों की शान,
तेरे चरणों में जग का मान।
दुष्टों के मन में भय भरती,
भक्तों की झोली तू भरती,
निर्बल को बल, दुखियों को आस,तेरे नाम से मिटे उदास।
जब-जब मन पर संकट छाए,जब कोई अपना दूर हो जाए,तेरी चौखट याद में आए,तेरा नाम हृदय दोहराए।
माँ! मन में विश्वास जगा दे,
भटके पथ को राह दिखा दे,
क्रोध मिटे, सद्भाव सँवारे,
प्रेम के दीप हृदय में उतारे।
तेरी महिमा गाऊँ माँ,
तेरे ही गुण गाऊँ माँ,
तेरे चरणों में अरदास,
बनी रहे तुझमें मेरी आस।
चंद्रघंटा माँ, सुन ले पुकार,
कर दे भवसागर से पार,
तेरी भक्ति रहे दिन-रात,
तेरा आशीष रहे हर साथ।
जय-जय माँ चंद्रघंटा रानी,
तेरी महिमा अमर, कल्याणी।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ,
माँ, तेरी जय-जयकार मनाएँ।
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