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ढाई आखर

                
                                                         
                            ढाई आखर प्रेम के, जग का सबसे बड़ा विधान,
                                                                 
                            
जिसने इनको हृदय पढ़ा, वही हुआ धनवान।

न धन से ऊँचा मान है, न यश का कोई शोर,
प्रेम जहाँ मुस्काता है, खिल उठता हर छोर।

माँ की ममता, पिता का विश्वास,गुरु का निर्मल आशीष।
मित्र का सच्चा साथ जहाँ, वहीं बसता है ईश।

ढाई आखर जोड़ दें, टूटे हर संबंध,मन के सारे द्वेष को, कर दें पल में बंद।

प्रेम न केवल शब्द है, जीवन का विस्तार,सूखी धरती पर बरसे, सावन की फुहार।

जिसने बाँटी मुस्कानें, जिसने बाँटा नेह,
उसके चरणों में झुका, जग का सारा मेह।

चलो लिखें अब प्रेम से, हर दिन का इतिहास,
ढाई आखर बन जाएँ, मानवता की साँस।

नफ़रत की हर दीवार पर, प्रेम का दीपक धर,
ढाई आखर जीत गए, सारा जग यह कर।

ढाई आखर प्रेम के, केवल शब्द नहीं पहचान,
इन्हीं में बसता है सारा जग, यही सृष्टि का सम्मान।
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3 महीने पहले

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