तीन दिन हुए बप्पा, तुम घर में आए हो,सूने से आँगन में खुशियाँ लाए हो।
पहले दिन था उत्सव, दूसरे दिन अरमान,तीसरे दिन तुम बन गए दिल की पहचान।
अब सुबह तुम्हारी आरती से सजती है,हर शाम तुम्हारी मुस्कान से महकती है।
मोदक की मिठास में अपनापन घुल गया,देखते-देखते मन तुमसे ही जुड़ गया।
गणपति बप्पा, तुमसे एक बात कहनी है,जो मन में है मेरे, वो आज कहनी है।
मेरे घर की खुशियाँ यूँ ही बनाए रखना,हर मुश्किल में मेरा हाथ थामे रखना।
जहाँ उम्मीद थक जाए, वहाँ तुम राह बनाना,जहाँ आँसू आएँ, वहाँ हँसी सजाना।
मेरी छोटी-सी दुनिया को प्यार से भर देना,मेरे हर अधूरे सपने को पूरा कर देना।
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