नित जीवन के संघर्ष को
न मानो इसे रोडा़ तुम
जो इसको पार करेगा
नित नई राह स्वयं ढूंढेगा ।
हार-जीत का संघर्ष करना
सोना तपकर ही बनता गहना।
मिली जीत की खुशी जो
क्षणिक में भूलें बिसरे वो।
मिले हार का अनुभव जो
याद जीवन भर आए वो।
ठोकर सह न सका जो
चढ़ न पाए प्रथम सोपन को
हार में जो डूब गया तू
अवसाद से घिर गया तू।
आसान लगे फंदे पर चढ़ना
कठिन नहीं है इससे उबरना।
आसान नहीं है प्रगति की राह
बिना परिश्रम करें इसी की चाह।
कठोर परिश्रम से भरा कदम
मंद गति को देता दम।
फिर ऐसा इक दिन आयेगा
जीत की खबर लाएगा।
खुशियों से भरेगा मन
अनुभव से भरेगा जीवन।
जारी रहें आजीवन संघर्ष
जीवन का है यही निष्कर्ष।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X