रंगमंच है ज़िन्दगी
हर किसी का अपना किरदार है यहाँ
खत्म हो जाए सफर जो मेरा कभी
तो तुम मुस्कुराना न छोड़ना......
जो भी गीत गाए थे कभी हमने
मेरे बाद भी उन्हें गुनगुनाना न छोड़ना
लोगो की कर परवाह
खुद के अस्तित्व को तुम मत बिसराना....
लोगों से बयां करना बाते मेरी
बताना हम सब जो मिले थे कभी
मुस्कुराती शामे और रंगीन थी
राते वो सभी
मेरे बाद भी रहूंगा मैं
हर कहानी में तुम्हारी
बस, मेरे हर किस्से का ज़िक्र करना न छोड़ना......
हर उत्सव का जश्न मनाना
मातम न करना
मैं नहीं रहूँ मगर मुहब्बत पर मेरी
तुम एतबार करना
झूठी दिलासा देकर खुद को न छलना
मेरे बाद भी मेरा कमरा
सजाया करना
सच को स्वीकार कर
यु ही आगे बढ़ जाना....
- श्रद्धा चिराग भट्ट
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X