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अनकहा प्रेम

                
                                                         
                            जहाँ शब्दों की ज़रूरत न पड़े,
                                                                 
                            
बस मौजूदगी काफी हो,
सुकून वही है जहाँ
हर खता की पहले से माफी हो।
किसी के कंधे पर
सिर रखकर चुपचाप बैठ जाना,
और बिना कहे ही सारा
हाल-ए-दिल कह जाना।
रिश्तों में जब यकीन का
गहरा समंदर होता है,
चैन तब दुनिया के बाहर नहीं,
मन के भीतर होता है।
दिखावे की मोहब्बत तो सिर्फ
तमाशा करती है,
सच्ची शांति तो
खामोश निगाहों में बसती है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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