राखी का धागा केवल, कलाई का श्रृंगार नहीं,
भाई-बहन के प्रेम से बढ़कर, कोई उपहार नहीं।
बहना अबला नहीं, वह खुद अपनी ढाल बने,
उसके सपनों को पंख मिलें, वह अपनी मिसाल बने।
लड़का-लड़की का भेद मिटे, दोनों को मिले अधिकार,
समान अवसर, समान सम्मान—यही हो सच्चा प्यार।
लड़कों को भी सीख मिले—नारी का सम्मान करें,
उसकी इच्छा, उसकी गरिमा का हर पल मान करें।
रक्षा केवल बहन की नहीं, दोनों का हो अधिकार,
दोस्ती, विश्वास और सम्मान से, बढ़े रिश्तों का प्यार।
राखी केवल पर्व नहीं, बदलाव का त्योहार—
हर कलाई पर आज लिखें हम—समानता, सम्मान और प्यार।
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