कब ख़त्म होगी ये दौड़
उम्मीदों की,
आकांक्षाओं की,
रुकना चाहती हूं मै,
ठहरना चाहती हूं मै|
एक अरसा हो गया है ,
पल भर सुकून से बैठे,
ठहरना चाहती हूं मै,
रुकना चाहती हूं मैं|
सारी चिंताओं को छोड़कर,
अपेक्षाओं से मुह मोड़कर,
खुश होना चाहती हूं मैं
रुकना चाहती हूं मैं|
घर की वर्षों की यादें है,
नयी याद कोई बनी नहीं,
अपनों से मिलना चाहती हूं मैं ,
रुकना चाहती हूं मै|
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