आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बदनाम

                
                                                         
                            जब से चले ट्रेंडिंगा में यो ,
                                                                 
                            
नाम रखे बस ये पेंडिंगा में यो ।
बाता करे बस इनकॉम की छोरी,
आज कल घुमरिया इंटोलिया में छोरी।

नाम के पर्चे गावां के दीवारा लगे ,
चाले गाड़ी रोड तो सिक्क्युरियोटियो क पहरा लगे ।
काले शीशे वाली गाड़ी, मारे काफिला साथ चाले,
जिधर से निकले सारे गाड़ी, उधर चर्चे सारे आम चाले ,
तेरे यार की छोरी , गांवा से शहर तक ,यो ,बदनाम रे छोरी।

तेरे यार के नाम का, हर नुक्कड़ पे शोर चले,
जहाँ खड़े हो जावें छोरे, वहीं अपना दौर चले।
ठाठ-बाट देसी अपना, जूते चमकें धूल में,
अपने चर्चे रोज़ छपें, शहर के हर उसूल में।

जेब में ना घमंड, ना दिल में कोई खोट आई ,
बात रखें दिल की, फिर याद उसकी लौट आई l
महफ़िल में हँसते रहा, तन्हाई में रात रोई,
बात उसकी, याद फिर लौट आई |

घणी ना दिखावे, फिर भी बात बड़ी,
छोरी तेरे यारा की गूंज, हर गांवा में पड़ी।
गांवा की गलियां में, चर्चा घणी
घणी ना दिखावे, फिर भी बात बड़ी,

यार तेरा यो बदनाम रे छोरी,
गांवा से शहर तक ,यो का नाम रे छोरी
- शिवम यादव 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
38 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर