क्या कहा तुमने? शिक्षा से न कोई अच्छा?
फिर क्यों पढ़े-लिखे खा रहे हैं गच्चा
छटाँक सी नौकरी की भर्तियाँँ
उस पर बेरहम सिफ़ारिशी पर्चियाँ
या तो देश छोड़कर चले जाना
या अधिकारी बन हुक़्म चलाना
शिक्षा के दो ही फ़ायदे
वरना नहीं ये किसी क़ायदे
इस देश में डिग्री नहीं गुण्डागर्दी है चलती
तर्कजीवियों से रुढ़ियों की न बनती
युवाओं को अब पढ़ना नहीं चाहिए
किसी नेता का पिछलग्गू हो जाना चाहिए
धर्म के ठेकेदारों के दल में हो जाओ शामिल
रैलियों का शोर हो छुटभैयाओं की महफ़िल
सरपंची पार्षद का लड़ो चुनाव
लाचारों पर धौंस दिखाओ
कलेक्टर कमिश्नर सब देंगे सलामी
अनपढ़ मंत्रियों की शिक्षित करें ग़ुलामी।
शिवम् खरे
पन्ना, मध्यप्रदेश
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