जिए अब तक सबके लिए
कब जिए थे अपने लिए ,
वक्त मिलेगा तो सोचेंगे ।
बनाने को तुम्हारा हर पल खास ,
जब नहीं मारे थे अपने एहसास
कौन सा था भोपाल खास ,
वक्त मिलेगा तो सोचेंगे।
अजब था मेरे समर्पण का जुनून
महसूस किया करती मैं तेरे गम को मेरा गम
तेरे सुकून को मेरा सुकून ,
महसूस किए थे कब तुमने मेरे जज्बात,
वक्त मिलेगा तो सोचेंगे ।
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