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संतान की नींव पिता है

                
                                                         
                            चारों ओर है मां का गुणगान,
                                                                 
                            
पर पिता का प्यार भी है एक समान।
मां है जननी जन्मदायिनी ,
तो बच्चों की पहचान पिता है।
मां की गोद है ममतामई ,
तो सर की छांव पिता है ।

मां के लिए तो सबने पड़ा है ,
पर पिता का स्थान भी सबसे बड़ा है ।
मां पीपल कि शीतल छांव,
तो जेठ कि तपती धूप पिता है,
तुम्हारे लिए हर मौसम से लड़ा पिता है।

तुझको उससे बहुत आगे देखता,
जिस जगह पर वह आज खड़ा है ,
तुम्हारा सच्चा मार्गदर्शक बना पिता है।

माना नहीं दे पाता वह आपको फुल अटेंशन ,
पर दिमाग में रहता हर पल आपका ही टेंशन ,
तुमको कब क्या चाहिए इसी व्यवस्था में वो लगा है,
तुम्हारी हर जरूरत पिता को पता है।

माना पिता प्यार नहीं जताता,
पर मुसीबत में सबसे पहले याद वो ही आता,
तुम्हारी हर मुश्किल का हल पिता है।

माता है मीठी लोरी, तो कटु वचन पिता है,
एक कठोर आवरण में छुपा "कोमल मन"पिता है।
जो तुमको खुद से बेहतर बनाने में जुटा है ,
हां उसी देवता का नाम पिता है।

माना माता से घर बना है
पर उस घर की नींव पिता है ,
नजर नहीं आता ,पर उस पर ही
सारा घर टिका है
पिता से ही हमारा सम्मान बड़ा है
संतान की आन,बान ,शान,पिता है।
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2 महीने पहले

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