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इंसाफ हो नारी के संग

                
                                                         
                            उसका तो नहीं था कोई "लव जेहाद"
                                                                 
                            
उसने तो नहीं अपनाया था कोई "गैर धर्म"
ओ धर्म के ठेकेदारों अब तुम ही बोलो,
फिर क्यों हुआ उसके साथ यह दिल दहला देने वाला "घिनौना दुष्कर्म"।

उसने तो नहीं पहने थे तड़कते भड़कते"छोटे परिधान",
उसने तो नहीं किया था कभी माता पिता और शिक्षा अपमान ।

उसके तो नहीं थी दिख रहे थे कहीं से कोई अंग,
उसके तो नहीं थे कहीं से कपड़े तंग,
उसने तो धारण किया था शांति का प्रतीक सफेद रंग ,
वह बेचारी तो नहीं गई थी सैर सपाटे पर अपने
बॉयफ्रेंड के संग
ओ कानून के रखवालों अब तो इंसाफ करो नारी के संग।

धर्म के नाम पर अबला की चीख दबाने वालों,
अब क्या जवाब है तुम्हारे पास नारी के "छोटे कपड़ों"पर उंगली उठाने वालों।

"बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ" यही बार-बार बस चिल्लाते जाओ
अरे चिल्लाने बालों बेटियों को अपने वोटों के लिए मत बली चढ़ाओ ,
लाडली बहना,लाडली लक्ष्मी, सुकन्या को तुम पहले इन दरिंदों से बचाओ,
इन भेड़ियों के लिए कोई सख्त कानून बनाओ,
बीच चौराहे पर इन भेड़ियों की क्रूर लालसा को तुम जड़ से मिटाओ,
फांसी से भी सख्त सजा इसको "नपुंसक" बनाओ ।
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2 वर्ष पहले

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