तुम दिल की इतनी भोली हो,
जैसे मछली को प्यास नही,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही
तू कहना कोई खास नही,
कोई पागल है या आवारा,
या होगा कोई बुध्धु सा
या प्यार मे पागल बेचारा,
दिन रात बिखरता टूटके वो,
कोई था जो,
अब उसके पास नही,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही,
कई वादे बिन पुछे करके,
कई तोड़े जोड़े पुछ के वो,
हमको करके बदनाम यहाँ,
बिच राह मे छोडे रूठ के वो,
तुम जब रुठे मै प्यार किया,
मै रुठा तो,
मुझमे कोई रास नही,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही,
तेरे खास नही थे बेगाने,
अब बेगाने तेरे यार हुए,
चुपके-चुपके से मिल-मिल के,
कई बरसो से तुम्हे प्यार हुए,
जब गैरो से तुम्हे प्यार हुआ,
आना मेरे ना पास कभी,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही,
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