आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुम दिल की इतनी भोली हो

                
                                                         
                            तुम दिल की इतनी भोली हो,
                                                                 
                            
जैसे मछली को प्यास नही,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही

तू कहना कोई खास नही,
कोई पागल है या आवारा,
या होगा कोई बुध्धु सा
या प्यार मे पागल बेचारा,

दिन रात बिखरता टूटके वो,
कोई था जो,
अब उसके पास नही,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही,

कई वादे बिन पुछे करके,
कई तोड़े जोड़े पुछ के वो,
हमको करके बदनाम यहाँ,
बिच राह मे छोडे रूठ के वो,

तुम जब रुठे मै प्यार किया,
मै रुठा तो,
मुझमे कोई रास नही,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही,

तेरे खास नही थे बेगाने,
अब बेगाने तेरे यार हुए,
चुपके-चुपके से मिल-मिल के,
कई बरसो से तुम्हे प्यार हुए,

जब गैरो से तुम्हे प्यार हुआ,
आना मेरे ना पास कभी,
कोई पुछे तुमसे कौन हूँ मै,
तुम कहना कोई खास नही,


 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर