फ़िर आज ख़ुशी का वो दिन आया, मंगलमय वो बेला आई !
७२ वें स्वतन्त्रता दिन की, आप सबको बहुत बधाई !!
स्वाधीनता का संग्राम बड़ा था, अस्तित्व की थी वो लड़ाई !
एक होकर वो सभी लड़े थे, हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई !!
खोया किसी ने माता-बहन को, किसी ने पुत्र तो किसी ने भाई !
किसी ने अपनों को खोकर तो किसी ने प्राणों से आज़ादी दिलाई !!
प्राणों की भी ना की चिन्ता, ना अपनों की दी थी दुहाई !
क्रान्तिवीरों नमन है तुमको, आज़ादी की जोत जगाई !!
देशवासियों अब तो समझो, इस ऋण की करो भरपाई !
बन्द करो ये ख़ून-ख़राबा, धर्म-जात-भाषा की लड़ाई !!
स्वार्थ में तुम अन्ध हो गए, बलिदानों की याद न आई !
लाखों ने था ख़ून से सींचा, तब आज़ादी की फ़सल लहाई !!
सम्हलो अब तो वक़्त के रहते, नफ़रत किसी के काम न आई !
एक ही वृक्ष की शाख़ें हैं हम, हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई !!
इन्सानीयत ही सबसे बड़ी है, बनें एक-दूसरे की परछाईं !
आज़ादी मुबारक़ सबको, इस शुभ दिन की सबको बधाई !!
शिशिर घाटपाण्डे
मुम्बई
०९९२०४ ००११४, ०७०००८ ५०५०५
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