प्रेम जो शब्दों से बड़ा था,
उसे कभी कह नहीं पायी।
जो आँखों की नमी में था,
उसे होंठों तक ला नहीं पायी।
तुमने पूछा भी नहीं,
और मैंने बताया भी नहीं।
बस खामोशियाँ ही
हमारे बीच बनती रहीं।
तुम्हारी एक मुस्कान में
मैंने पूरी दुनिया देखी,
और तुम्हारे एक मौन ने
मुझसे मेरा समूचा आकाश छीन लिया।
आज भी जब हवाएँ
तुम्हारा नाम छूकर गुजरती हैं,
तो लगता है
प्रेम कभी कम नहीं होता,
वह केवल शब्दों से परे चला जाता है।
क्योंकि सच्चा प्रेम
कहा नहीं जाता...
बस जिया जाता है।
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