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कोरोना महामारी

Corona pandemic
                
                                                         
                            इस कोरोना ने भी क्या खूब रंग दिखलाया है,
                                                                 
                            
एक वर्ष तो बिता ना सके दूजे पर भी कहर ढाया है।
याद है वह पल मुझे पिछले मार्च के ,
किस कद्र सारे विश्व में सन्नाटा छाया था।
मार्च से जुलाई तक आ गया था ,
पर पूरे संसार में दहशत का साया था।
शिक्षा ,अर्थव्यवस्था हर क्षेत्र में गिरावट आई थी,
ज्यों त्यों संभले दिसंबर तक आकर ।
दोबारा से कोरोना की घंटी सुनाई दी,
एक साल तो संभल गए जैसे तैसे ,
पर अब क्या वापस संभल पाएंगे।
बढ़ते हालातों को देखकर तो लगता है ऐसे,
यह वर्ष 2021 भी इसी दहशत में बिताएंगे।
कैसी यह महामारी सारे विश्व में आ गई है,
ऐसा लगता है हम सबका काल बन कर छा गई है।
कैसी यह बीमारी जिसकी बनी कोई ठोस दवा नहीं,
विज्ञान भी इसके आगे सिर झुकाए पीछे रह गई
विकसित देशों में तो तकनीकी भी भरमार है,
फिर भी इस महामारी के आगे हुई सब बेकार है।
अब तो ईश्वर से ही विनती दिन-रात यह हमारी है,
आकर सब के प्राण बचा लो अब तो ,
आपके ही नए अवतार की बारी है।।
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले

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