समंदर के किनारे बैठ,जिस सुकूँ की तलाश में हो,
दरअसल, भीतर के शोर को थामने की आस में हो।
वक्त मिलता कहां की बात अपने आप से कर लो
लहरें गवाह हैं कि तुम, किसी गहरी प्यास में हो।
-शैलेंद्र शुक्ला"हलदौना "
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