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खुद ही दस्तक खुद ही दरवाजा

                
                                                         
                            जीवन की तो ये ही परिभाषा
                                                                 
                            
खुद ही दस्तक खुद ही दरवाजा ।

खुद ही राह खुद ही रहगुज़र
खुद ही तो मंजिल की आवाज़ा ।

खुद ही तूफ़ां, खुद ही कश्ती,
खुद ही साहिल की अंदाज़ा।

खुद ही लम्हां खुद ही जीना
खुद ही आखिर में क़ज़ा ।

हलदौना ,क्यों ढूँढे तू औरों को,
खुद ही बंदा, खुद ही तू रज़ा ।
-शैलेंद्र शुक्ला "हलदौना"

 
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2 महीने पहले

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