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भारत माता का संदेश लाया हूँ

                
                                                         
                            मुबारक हो तुमको यह आज़ादी तुम्हारी!
                                                                 
                            
यह झूठी जगमगाहट, यह ढोंग और यह आतिशबाज़ी तुम्हारी।
मगर सुनो ऐ दुनिया वालों! मैं उस निर्जन शिखर से आया हूँ,
ज़रा कान खोलकर सुनो, मैं भारत माता का संदेश लाया हूँ!
फिरंगियों की दासता से छूटकर समझते हो कि तुम मुक्त हो गए?
सच तो यह है कि तुम संकीर्णताओं के विषैले जाल में भुक्त हो गए।
सत्ता की लिप्सा में हर रोज़ नीलाम होता यहाँ ईमान है,
जहाँ स्वार्थ की वेदी पर बलि चढ़ता राष्ट्र का स्वाभिमान है।
पंथ, मज़हब और जाति की जो तुमने खींची हैं विभाजक रेखाएँ,
तिल-तिल कर दम तोड़ती हैं उन संकीर्ण दीवारों में मेरी आशाएँ।
संसार के लोगो! मैं जननी की वही तड़प तुम्हें सुनाने आया हूँ,
ज़रा कान खोलकर सुनो, मैं भारत माता का संदेश लाया हूँ!
जिस पावन धरा पर कभी नारी को देवी मानकर मस्तक झुक जाता था,
जहाँ सीता और सावित्री के त्याग का पावन गुणगान किया जाता था।
आज उसी माटी पर मेरी बेटियों की अस्मत सरेआम नीलाम होती है,
सड़कों से लेकर कोखों तक, हैवानियत की भयानक शाम होती है।
मासूमों की आर्तचीखें घोंट दी जाती हैं न्याय की ढोंगी चौखट पर,
और पिशाच बेफ़िक्र ठहाके लगाते हैं आज़ादी के इस पर्व पर।
मैं उसी लहूलुहान आंचल की सौगंध देकर तुम्हें जगाने आया हूँ,
ज़रा कान खोलकर सुनो, मैं भारत माता का संदेश लाया हूँ!
राष्ट्र की तरुणाई आज बेरोज़गारी के भयावह भंवर में भटक रही,
कागज़ की डिग्रियों के संग, युवाओं की अमूल्य जवानी बिलख रही।
अन्नदाता खेत की सूखी छाती पर लहू बहाकर भी कर्ज़ में रोता है,
और भ्रष्टाचार का दानव हर व्यवस्था की गोद में बेफ़िक्र सोता है।
क्या इसीलिए भगत सिंह ने फाँसी के फंदे को कण्ठहार बनाया था?
क्या इसीलिए सुभाष ने सब त्याग कर क्रांति का अलख जगाया था?
मैं शहीदों के बहते अश्रुओं की ज्वाला तुम्हें थमाने आया हूँ,
ज़रा कान खोलकर सुनो, मैं भारत माता का संदेश लाया हूँ!
फेंक दो ये आडंबर के वस्त्र, यदि नारी की आबरू न बचा सको,
व्यर्थ है यह स्वाधीनता का ढोंग, यदि जननी की पीर न मिटा सको।
उठो! नफ़रत के इस महाजाल को सत्य और सद्भाव से काटो,
शहीदों के बहते लहू की सौगंध, इस माटी को टुकड़ों में न बाँटो।
मैं चेताने आया हूँ तुमको, करने आया हूँ तुमसे अंतिम आह्वान,
ताकि खंडित न हो यह धरा और अमर रहे वीरों का बलिदान।
मैं तुम्हारी सोई हुई चेतना में क्रांति का नया शंखनाद करने आया हूँ,
ज़रा कान खोलकर सुनो, मैं भारत माता का संदेश लाया हूँ!
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2 महीने पहले

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