घर और परिवार छोड़कर...
हर कोई नहीं बन जाता बुद्ध ,,
कुछ खो जाते हैं , गुमनामी के अंधेरे में.....
किन्हीं को , निगल लेती है अकाल मृत्यु ,,
घर छोड़कर...
बुद्ध बन जाना इतना भी आसान नहीं !!
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