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गुलाब और मुहब्बत

                
                                                         
                            काँटों भरे रास्तों पर भी वो हँस के चलेगा,
                                                                 
                            
हर ज़ख़्म को अपनी ही मुस्कान से भर देगा।
अंधेरों की बिसात ही क्या है चिराग़ के आगे,
वो दिल में उम्मीद की एक लौ जला देगा।
शशि गुलाब देगा गुलाब लेगा,
नफ़रत को मुहब्बत से मार देगा।

 
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एक महीने पहले

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